यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

ज़िंदगी....कब ज़िओगे !

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"ज़िंदगी"! एक खुशनुमा शब्द      जिसके नाम से ही,जीने का   एहसास हो जाता है !      उल्लास का,खुशी का, लुत्फ़ उठाने का  ...

छोटी-छोटी खुशियाँ......

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              रात से ही आसमान में कुछ अज़ीब सा समाँ है. काले घने फैले बादल उम्मीद जता रहे हैं, कि आज तो हम बरस ही जाएँगे. बारिश का इंत...

कैसे बनें करोड़पति !

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मुआ, जब से ये 'के.बी.सी.' चालू हुआ है. ना दिन में चैन है..ना रातों को आराम! बचपन से यही तो सपना देखते आ रहे हैं,अमिताभ जी से मिल...
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Preeti 'Agyaat'
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