यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

गुरुवार, 28 अगस्त 2014

शतायु भव:

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जीवन, ज़िंदगी, साँसें, धड़कन, आरज़ू, प्रेम, इंतज़ार, मायूसी, कभी खुशी कभी ग़म की तर्ज़ पर डूबती-उतराती ये ज़िंदगानी. चाहे कितनी भी शिक़ाय...
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शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

'स्वतंत्रता'.... महसूस क्यों नही होती ?

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चित्र - गूगल से साभार सोमवार से लेकर शनिवार तक, हम सभी की दिनचर्या कितनी नियमितता से चला करती है. वही समय पर उठना, रोजमर्रा की दौड़-भा...
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गुरुवार, 31 जुलाई 2014

'माँ' जैसी

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माँ अक़्सर ही अपनी रोटियाँ जल्दी में बनाया करतीं थीं. सबको गरमागरम, मुलायम, घी लगी रोटियाँ परोसने के बाद कभी अधसिकी, कभी जली हुई, कभी दो ...
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शनिवार, 19 जुलाई 2014

'मैगी' साहित्य

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हम वही खाते हैं, जो परोसा जाता है. हिन्दी सिनेमा में द्विअर्थी संवाद या गानों के लिए आजकल यही तर्क़ दिया जाता  रहा  है. दर्शक फिल्मकारों ...
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गुरुवार, 3 जुलाई 2014

जज़्बाती-संक्रमण :)

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बहुत दिनों बाद ऐसा हुआ, कि न्यूज़ देखने के बाद मूड और भी अच्छा हो गया ! NDTV वालों ने बताया कि FACEBOOK ने ये जो चुपचाप Research की थी ना...
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शुक्रवार, 27 जून 2014

'गर्व से कहो हम भारतीय हैं !'

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'गर्व से कहो हम भारतीय हैं !' कहते थे, कहते हैं और आगे भी कहते ही रहेंगे. पर, अब ये कहने में वो पहले सा आत्मविश्वास नहीं रहा. बल्...
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बुधवार, 30 अप्रैल 2014

अनजानी सी पहचान

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संभवत: दो वर्ष पूर्व की ही बात रही होगी ये ! मैं ट्रेन में सफ़र कर रही थी, दुर्भाग्य से ऊपर की बर्थ ही मिली थी मुझे. मैं उन लोगों में से ...
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शनिवार, 26 अप्रैल 2014

'एकालाप'

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जानती हूँ, अब यहाँ आने का कोई फायदा नहीं ..फिर भी आती हूँ रोज, उसी तयशुदा समय पर ! ये भी पता है कि अब मेरी हर दस्तक़ का जवाब नहीं मि...
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बुधवार, 23 अप्रैल 2014

प्रेम डगर

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Disclaimer :  यह एक अच्छे मूड में लिखे गये विचार हैं, जिसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं ! प्रेम' मात्र एक शब्द ही न...
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सोमवार, 21 अप्रैल 2014

'जान'

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'जान' का अर्थ उसके लिए जीवन ही हुआ करता था. जब कभी आज के जमाने के लोगों को, या यूँ कहें कि प्रेमी-प्रेमिकाओं को एक दूसरे के लिए ...

स्कूल की घंटी

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स्कूल की घंटी से ज़्यादा मधुर ध्वनि किसी भी वाद्य-यंत्र से नहीं निकल सकती, इसके संगीत से रग-रग कैसे झूमने लगती है ! मन-मस्तिष्क में ...

लो, हम बड़े हो गये.. :P

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आज किसी ने मुझे बड़े होने का अल्टीमेटम दे दिया है...उफ्फ, अब मैं क्या करूँ, कहाँ जाऊं ? :( हेलो, हाँ..जी आप से ही ये समझदारी कौन सी ...
शनिवार, 19 अप्रैल 2014

आख़िरी ख़त (लघुकथा)

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शनिवार को मैंने तुम्हें एक ख़ास बात कहने के लिए ही कॉल किया था. मन-ही-मन कितना खुश थी मैं, कि जो बोलूँगी सुनकर तुम्हें भी बहुत अच्छा लगेग...
शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

ULLU BANAAVING

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१ अप्रैल, २०१४ 'मूर्ख-दिवस' , ह्म्‍म्म्मम...... !  कित्ता बुरा लगता है न, जब कोई अपने को उल्लू बनाए ! थोड़ी सी शर्म भी आती है, क...

काश !

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काश ! सपनों का भी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र होता, फिर न कुचले जाते ये इस तरह, हर बार, हर जन्म में ! एक जीवन में पलकों तले पलते हुए अनगिनत स्...

:(

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सत्य अक़्सर ही कोने में छुपा अकेला सूबकता है, लोग झूठ की तलाश में व्यस्त जो रहते हैं ! सत्य कायर तो नहीं है ,ये ज़रूरत से कुछ ज़्यादा ही ...
शनिवार, 29 मार्च 2014

स्वप्न की दहलीज़ पर (लघु-कथा)

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वो बरसों तक उसी दहलीज़ पर ही थी. भरे हुए नयनों से बहुत कुछ कहना चाहती थी, पर शब्द गले तक आकर ही अपना दम घोंट लिया करते थे. कभी दो-चा...
रविवार, 23 मार्च 2014

'एक राष्ट्र, एक सोच....एक दल'

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राजनीति और इससे जुड़ी बातें मुझे आज तक समझ नहीं आईं. जितना ही समझने की कोशिश की और उलझती चली गई. एक तरफ तो सभी पार्टियाँ राष्ट्रीय-एकता और ...
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रविवार, 16 मार्च 2014

'ज़िंदगी'....जीने के लिए ही तो बनी है !

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'आत्महत्या' एक प्रकार की हत्या ही है. फ़र्क बस इतना ही है, कि इसमें इंसान अपने मरने के तरीके खुद चुनता है; माहौल तो दूसरे या उसके अ...
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सोमवार, 10 मार्च 2014

लत लग गई...... :P

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लोग कहते हैं, कि लड़के हमेशा लड़कियों के इर्द-गिर्द चक्कर लगाया करते हैं. पर मुझे ऐसा क्यूँ लगता है कि ये प्रथा तो हमारी पृथ्वी जी ने शुर...
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शुक्रवार, 7 मार्च 2014

होता है, जी....

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कई बार ऐसा होता है न, कि कोई इन्सान हमें अपने-आप से भी ज़्यादा ज़रूरी लगने लगता है, हर-वक़्त जेहन में वही एक नाम घूमता रहता है और जो कह...
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रविवार, 23 फ़रवरी 2014

लौट आओ तुम (लघु-कथा)

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नहीं मालूम, कि आज मैं ये सब क्यों लिख रही हूँ. मैं चाहती भी हूँ, कि तुम इसे पढ़ो और डर भी है..कहीं पढ़ न लो ! इसीलिए पत्र नहीं लिखा, सब क...
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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

'इकतरफ़ा दोस्ती' कहानी का एक अंश

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खुशक़िस्मत हो, जो इतने दोस्त हैं तुम्हारे ! जब जी चाहा, हाथ थामे घूमने निकल गये, घंटों फोन पर बातें कीं, या फिर यूँ ही जंगल में भटकते फि...
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शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

:)

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कितने छुटकु से तो वाक्य हैं, 'कैसे हो?', "अपना ध्यान रखना". अँग्रेज़ी में बोले तो How are you ?, Take Care. पर इन शब्दो...
बुधवार, 15 जनवरी 2014

कैसा ये इश्क़ है

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'प्यार' बड़ा ही अनमोल सा शब्द लगता है, सिर्फ़ तभी तक; जब तक हुआ न हो. कुछ फिल्मों का प्रभाव और कुछ कल्पनाओं की उड़ान जब एक साथ पर...
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गुरुवार, 9 जनवरी 2014

हम नहीं सुधरेंगे..

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 क्या किया जाए, ऐसे प्राणी का... * गीला तौलिया पलंग पर (कब तक बर्दाश्त किया जा सकता है..) * गंदे कपड़े, बास्केट के कदमों तले ( निशान...
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