यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

शनिवार, 26 मार्च 2016

ये उम्मीद इन दिनों तोड़ देती है......

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डॉ. नारंग की हत्या न तो सांप्रदायिक है और न ही आतंकवादी हमला। ये एक बार फिर 'इंसानियत' की मौत है। जहाँ लोगों के कानों तक किसी ...
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सोमवार, 14 मार्च 2016

पहने तो करता है,चुर्र...

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  आये दिन न्यूज़ चैनलों में ख़बरें रहतीं हैं कि फलाने, 'आम' आदमी ने ढिमके 'ख़ास' को जूता फेंककर मारा। ये बहुत गलत एवं निंदनीय...
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मंगलवार, 8 मार्च 2016

मैं सोचती रही, क्या कहूँ उसे...

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मैं सोचती रही, क्या कहूँ उसे... 'अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस' की शुभकामनाएँ, बोलना उतना ही आसान है जैसा कि 'स्वतंत्रता दिवस ...
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गुरुवार, 3 मार्च 2016

उन्हें पहले-सा कर दीजिये, प्लीज!

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गीली तौलिया को पलंग पर रखे बिना ही  सुखा आते हैं आँगन में चिड़ियों का पानी रखते हुए सोफे के नीचे छुपे जूते की, वो बदबूदार मोज़े  अब ...
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शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

ताज्जुब नहीं!

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"12 -14 वर्ष की लड़कियों के साथ सबसे ज्यादा बलात्कार होता है, आपको मौका मिले आप भी नहीं छोड़ेंगे" - पप्पू यादव  जब तक इन महानुभा...
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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

रेलगाड़ी -रेलगाड़ी

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सुना है रेल बजट आ रहा है, पूरा यक़ीन है कि रेल से जुडी यह एकमात्र बात है जो अपने निर्धारित समय पर होती है। बाकी जो है, सो हम और आप जानते ह...
बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

सलाम, नीरजा!

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एक समय था जब मैं बहुत फ़िल्में देखती थी। अच्छी फिल्मों के शानदार सीन दिलो-दिमाग पर अगली अच्छी फिल्म देख लेने तक छाए रहते थे। किसी के गीत, गु...
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गुरुवार, 28 जनवरी 2016

सफ़र में....

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ट्रेन की खिड़की से सर को टिकाये बैठी मैं झांकती हूँ बंद खिड़कियों से. वही खेत-खलिहान, कुछ कच्चे मकान, सदियों पुराने उन्हीं विज्ञापनों से रंगी...
सोमवार, 4 जनवरी 2016

लेखन मेरी प्राणवायु

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शब्द ही शब्द मंडराते हैं हर तरफ, सहेजना चाहती हूँ उन्हें, गागर में सागर की तरह, वक़्त की धूल कभी आँखों में किरकिरी बन नमी ला देती है, तो कभी...
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रविवार, 3 जनवरी 2016

साँसों की पतवार

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अहमियत 'साथ' की उतनी नहीं होती जितनी कि साथ होने के अहसास की होती है! 'मैं हूँ न' की आश्वस्ति से अधिक किसी को कुछ नहीं चा...
बुधवार, 30 दिसंबर 2015

सौदामिनी की याद में.....!

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वो अपने पिता की सबसे दुलारी थी. माँ की आँखों का तारा थी. उसका भाई, उसके लिए सारी दुनिया से लड़ सकता था. सब दोस्त उसके हँसमुख स्वभाव के का...
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बुधवार, 16 दिसंबर 2015

कुछ तो लोग कहेंगे..!

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संवैधानिक अधिकार बताया जाता है और यह है भी। परन्तु सच्चाई सुनने के बाद की तिलमिलाहट भी जगजाहिर है। आख़िर क्या कि...
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गुरुवार, 19 नवंबर 2015

आह.…मेरे सपनों का भारत!

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इतिहास गवाह है, धार्मिकता की आड़ में सबसे ज़्यादा पाप और अत्याचार होते आए हैं।  अब 'प्रतिबंध' की राजनीति को लेकर सब कटिबद्ध हैं।...
शनिवार, 7 नवंबर 2015

नुक्कड़ वार्ता

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(दो दोस्त, पॉपकॉर्न खाते हुए)  उफ्फ, ये कचरा कहाँ फेंकूँ? वो देख न उधर.…एक खाली रैपर पड़ा है, वहीँ डाल दे. और नहीं तो क्या! एक हमार...
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बुधवार, 28 अक्टूबर 2015

'रिश्ते' या 'प्रशस्ति-पत्र?'

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'रिश्ते' कुछ नहीं, एक प्रशस्ति-पत्र के सिवा! जब तक पढ़ते रहो, रहेंगे और पीड़ा बाँटते ही छिटककर दूर खड़े हो जाते हैं! या कि मानव-मस्...
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बुधवार, 7 अक्टूबर 2015

कवि को जूझना आता है.....

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रचनाकार केवल उतना ही नहीं होता, जितना दिखाई देता है! उसकी रचनाएँ एक जीवन की पूरी कहानी कहती हैं, उसकी सोच उसके आसपास के वातावरण, सामाजिक व...
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मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

बनारस

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बनारस से मेरा रिश्ता बहुत पुराना है, इतना कि मुझे खुद भी याद नहीं! पहली बार वहाँ जाना तब हुआ था जब नानी जी को cancer था और मिर्ज़ापुर के डॉक...
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सोमवार, 7 सितंबर 2015

'सच' तो ये.... 'सच' कुछ भी नहीं !

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क्या मैं हमेशा सच बोलती हूँ ? या बोल पाती हूँ ? यह बात ही सच की सच्चाई को बयां कर रही है. हाँ, मैं सच बोलना पसंद करती हूँ, पर हर बार सत्य ...
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मंगलवार, 4 अगस्त 2015

अनुशासन

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दो दशकों से भी ज्यादा पुरानी बात है ! तब जो भी बच्चा कक्षा में ज्यादा बात (बोले तो disturb ) करता था, उसे या तो आखिरी में दीवार की तरफ मुं...
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शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

इंटरनेट देवता जी

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हमारे परमपूज्य श्री श्री 1008 इंटरनेट देवता जी का निवास-स्थान कहाँ है ? :O मेरा उनसे विनम्र अनुरोध है कि वर्षा ऋतु में भी नियमितता बनाये र...
गुरुवार, 16 जुलाई 2015

'सौदामिनी', जीवन के आख़िरी पन्नों से......

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कितना आसान है ये कह देना, "बस तुम खुश रहो, मुझे और कुछ नहीं चाहिए ! अगर ये मेरे बिना सही, तो वो भी मंज़ूर है मुझे!" पर दिल क्या...
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