यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

स्वीटू

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  उन दिनों जब मैं यह मान ही चुकी थी कि कोई भी दोस्ती सच्ची नहीं होती और प्रेम झोंका भर है ग्रीष्म के छलछलाते माथे को पोंछती अनायास बहती ह...
शनिवार, 30 मार्च 2019

देश मेरा रंगरेज़ है बाबू

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मेरा जन्म गूगल युग से दो दशक पहले ही हो गया था और तब स्कूल के अलावा ज्ञान प्राप्त करने का एकमात्र सुलभ माध्यम पुस्तकें ही थीं। हाँ, दूरदर...
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गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

#अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

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भाषा, संवाद का जरिया है अहसासों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है. हम किसी भी माध्यम में पढ़ें हों, पर जहाँ बचपन गुजरा वहाँ की भाषा से लग...
बुधवार, 13 फ़रवरी 2019

प्रेम और ठंडी चाय

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वो दोनों, जिनके ह्रदय में अभी-अभी किसी सुनहरे ख़्वाब ने जन्म लिया है और जिन्हें लगता है कि उन्हें एक-दूसरे से बेपनाह इश्क़ है; पहले आप....क...
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रविवार, 10 फ़रवरी 2019

सुनो! प्रेम...तुम तब भी उम्मीद की तरह साथ बने रहना!

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प्रेम, रात के काले साए को अपनी रौशनी से जगमग कर देने वाला ऐसा अनोखा मनमोहक जादूगर है जिसकी अदृश्य टोपी में ख़ुशियों के सैकड़ों उत्साही ख़रगोश ...
शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

चिट्ठी न कोई संदेस

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'जग ने छीना मुझसे, मुझे जो भी लगा प्यारा' शायद ही कोई ऐसा संगीत-प्रेमी होगा, जिसने अपने जीवनकाल में यह पंक्ति न गुनगुनाई होगी!...
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शनिवार, 2 फ़रवरी 2019

प्रेमफरवरी-1

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कई बार किसी प्रेम कहानी का हिस्सा न होते हुए भी, प्रेम का हर दर्द भोगना होता है। हर रिसते घाव का साक्षी बनना होता है। किसी की आहों में अपनी...
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शनिवार, 26 जनवरी 2019

#गणतंत्र_दिवस

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एक पुरानी फ़िलम है 'गोलमाल',अपने अमोल पालेकर वाली. उसके सपने वाले गाने में एक बड़ी क्यूट लाइन है..."इक दिन सपने में देखी सपनी...
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रविवार, 13 जनवरी 2019

#मकरसंक्रांति #उत्तरायण

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संक्रांति के पावन पर्व पर जहाँ आसमान में लहराती, बलखाती हजारों पतंगें एक ख़ूबसूरत तस्वीर जड़ती हैं वहीं पक्षियों के बीच एक अजीब क़िस्म की बदहव...

#मकरसंक्रांति और पक्षी #Rescued

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परसों सुबह की ही बात है. बालकनी में बैठ मम्मी से फ़ोन पर बात कर रही थी कि अचानक नज़र बिजली के तार से झूलते एक कबूतर पर पड़ी, जो कि बुर...

#विश्व_पुस्तक_मेला

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लेखकों की दुनिया में 'विश्व पुस्तक मेला' एक बहुत बड़ा आयोजन माना जाता है. लेखक, प्रकाशक, पाठक तीनों से यदि एक साथ मुलाक़ात करनी हो तो...
शनिवार, 12 जनवरी 2019

विदा! एक भावुक कथा

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विदा! एक भावुक कथा  सर्दियों के नर्म मौसम में एक थकेहारे भारी-भरकम दिन के बाद, रात के ग्यारह बजे बड़े जतन से बनाई गई चाय का ढुलक जाना, उ...
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सोमवार, 31 दिसंबर 2018

#नववर्ष

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नया साल जैसे जैसे क़रीब आता जाता है, उसी गति के समानुपाती मस्तिष्क की सारी सोई हुई नसें आपातकालीन जागृत अवस्था को प्राप्त होती हैं। यही वो द...

#नववर्ष

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किसी वर्ष का गुजर जाना उन अधूरे वादों का मुँह फेरते हुए चुपचाप आगे बढ़ जाना है जो प्रत्येक वर्ष के प्रारंभ में स्वयं से किये जाते हैं.  ये ...
गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

#MirzaGhalib #ग़ालिब

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दिल के टूटने पर जहाँ दीवाने, आशिक़ ख़ुद को शराब के नशे या सिगरेट के धुंए में क़ैद कर 'कूल' लुक देने की stupid कोशिश किया करते हैं वहीं...
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सोमवार, 10 दिसंबर 2018

वही घिसा-पिटा किस्सा!

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हम चोरी, उठापटक, गुटबाजी, धोखे, झूठ और कॉपी पेस्ट के उस दौर में लिखे जा रहे हैं जहाँ लेखक सर्वाधिक असहाय प्राणी नज़र आता है. उसकी लिखी रचना ...
शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

#सूरज और चाँद

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रात के माथे पर दमकता चाँद अपने साथी सितारों के साथ गपशप करते हुए भरे गले से दिन की बेरुख़ी की तमाम शिक़ायतें करता है. इस गोलमटोल चंदा को इस ब...
बुधवार, 28 नवंबर 2018

फ़ुरसतिया लोग

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आप इन्हें चाहें कितने ही ऊँचे पदों पर बिठा दें लेकिन इनके दिमाग की सुई सीधा जाति पर ही पहुँच अटक जाती है और उसके बाद बहकी-बहकी बातों का धार...
शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

चाँद और बारिश

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वो बात करता है तो जवाब में पक्षी चहचहाते हैं, हँसता है तो फूलों की सुगंध तेजी से पसरने लगती है, इश्क़ की दुआ करता है तो तितलियाँ उसके बा...
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सोमवार, 19 नवंबर 2018

#पुरुषदिवस

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पुरुष होने के भी अपने फ़ायदे हैं. जब भी दिल करे आप जब चाहें, जहाँ चाहें, बे-रोकटोक आ-जा सकते हैं. आपके आने-जाने, सुरक्षा-संबंधी फ़िक्र करने औ...
बुधवार, 14 नवंबर 2018

मुख्तार सिंह का नाम सुना है तुमने?

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उन दिनों अच्छे स्कूलों का एक ही मतलब  हुआ करता था....न्यूनतम छुट्टियाँ, जमकर पढ़ाई और जबरदस्त अनुशासन (+ कुटाई किसी inbuilt app की तरह). ...
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बच्चों की मासूमियत और भोलेपन का उड़ता रंग

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परिवर्तन के इस दौर में विकास की चाल यदि कहीं द्रुतगति से चलती नज़र आती है तो वह है 'बचपन'। समय और सामाजिक परिस्थितियों से जूझते हुए ...
शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

#करवा चौथ

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आज सुबह ही तेजस ने पूछा था कि "दीदी, करवा चौथ पर कुछ क्यों नहीं लिखा?" और शायद मेरे व्रत सम्बन्धी जवाब को सुनकर उन्हें और भी ता...
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शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018

यूँ ही...

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ये जीवन भी बड़ी अजीब सी स्थिति में बनाये रखता है जब मन अच्छा हो और दिल ख़ुश तो सब कुछ बेहद आसान, सरल, सुंदर दिखाई देता है लेकिन जब मूड के ठीक...
शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018

#MeToo श्श! किसी को बताना मत!

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कुछ भी कहने के पहले मैं उन सभी स्त्री-पुरुषों को सलाम करती हूँ जो इस विषय पर बेझिझक साथ खड़े हैं. #MeToo Campaign के समर्थन में स्त्रियों क...
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Preeti 'Agyaat'
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