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मंगलवार, 5 मई 2020

किसको पता था, एक दिन अचानक दुनिया यूँ भी बदल जायेगी!

लॉकडाउन (lockdown) के इस समय में आज पहली बार घर से बाहर निकली. यूँ दूध-सब्ज़ी वग़ैरह के लिए कुछ क़दमों तक चलना हुआ है बीच में पर पक्षियों के favourite दाने दो दिन में ख़त्म होने को हैं, सो उसे लेने थोड़ा आगे गाड़ी से ही जाना था. जाते समय भी मन कोई ख़ास उत्साह से भरा तो नहीं था लेकिन लौटते समय एक अजीब सी निराशा ने घेर लिया हो जैसे.
सड़कों पर ऐसी मुर्दानगी छायी हुई है जैसे कि इनका कोई अपना मर गया हो. बंद दुकानों के बाहर पसरा सन्नाटा देख अब आसपास के पक्षियों और जानवरों का हौसला भी टूट सा गया दिखता है. सामान्य दिनों में कबूतरों के कई झुण्ड इस समय दाना चुगते नज़र आते थे, वे डरते नहीं थे लोगों से, बस क़दम साधकर वहाँ से निकलो और वे चुपचाप चुगते रहते. स्लेटी कबूतरों के बीच कभी-कभी एकाध सफ़ेद या भूरा कबूतर भी होता था और मेरी आँखें उसी पर अक़्सर टिकी रहतीं कि पूछूं, यार तुम भी माइग्रेंट हो क्या! 

सीमेंट की छोटी-छोटी टंकियाँ जो गुजरते गाय-भैंस या कुत्तों के लिए पानी से भरी रखी रहती थीं वो इस क़दर सूख चुकी हैं कि बस चटकने भर की देर है. मैं यह मान लेना चाहती हूँ कि इन सब पशु-पक्षियों  ने अपने भोजन-पानी की व्यवस्था ख़ुद कर ही ली होगी.  पर ये भी सोच रही हूँ कि न जाने इन्हें ये कैसे समझ आया होगा कि इनका ख़्याल रखने वाले वो सभी दुकानदार ख़ुद अपने दाना-पानी की तलाश में सिर को पकड़े बैठे हैं.
सड़कों के किनारे लगे खोमचे, ठेले और फुटपाथ पर सामान बेचते लोग सब नदारद हैं. मृत्यु का भय जो छा गया है. वे सभी कलाकार जो गर्मियों के दिनों में बच्चों को अपनी कला सिखा साल भर की क़माई इन्हीं दो-चार महीनों में कर लिया करते थे, आजकल भूख से लड़ रहे हैं. वे नहीं जानते ऑनलाइन काम कैसे किया जाता है. वे ही क्यों, उन जैसा कोई भी नहीं जानता कि इंटरनेट क्या होता है!

तक़नीक़ ने बड़े लोगों को सहारा दिया, मध्यम वर्ग भी जैसे-तैसे मर कटके जीना सीख ही गया है लेकिन निम्न वर्ग के हिस्से इस लड़ाई में भी हार ही आई है. वे कोरोना से बच भी गए तो क्या..भूख ही मार देगी उन्हें. हम उनके दर्द को समझ सकते हैं, एकाध तक पहुँच भी सकते हैं लेकिन एक बार अपनी गली से मेन चौराहे तक की लॉकडाउन से पहले के समय की, तस्वीर याद कीजिये; सामने सैकड़ों चेहरे आ खड़े होंगे. उनमें से कुछ की अंतड़ियाँ सूखकर चिपक गई होंगी और कुछ कोरोना से परिवार को बचाते-बचाते इस समय ईश्वर की गोदी में सो चुके होंगे. 
हम कोरोना से हुई मौत का आँकड़ा गिन रहे हैं और नंगे पैर मीलों पैदल चल दम तोड़ने वालों का कोई हिसाब ही नहीं लगाता! हमें दुनिया को यह दिखाकर खुश भी होना है कि देखो, हमने इन्हें कोरोना से नहीं मरने दिया! मृत्यु का क्या है वो तो सौ बीमारियों से पहले भी होती थी, सड़क पर लोग कुचले जाते थे, हत्याएँ होती थीं. मौत कौन सा दस्तक़ देकर आई है कभी! लेकिन उन मौतों के बीच जीवन सलामत तो दिखता था.
इन दिनों जो ख़ामोशी है वो भयावह है. यदि आप दुनिया के ख़त्म होने की तस्वीर समझना चाहते हैं तो सूनी रात के सन्नाटे को घर की खिड़की से महसूस कीजिये. या चार क़दम घर से बाहर चलने की हिम्मत भी इसे समझा देगी. लैम्पपोस्ट की लाइट भी यूँ चुभती है कि जैसे अभी-अभी इसके नीचे कोई बड़ा हादसा हुआ हो. रात भर रोते हुए कुत्तों की आवाजें डराने लगी हैं. 

इस पीढ़ी के बच्चों ने यूँ भी घर में दुबककर रहना सीख रखा था. अब दोस्तों के साथ की शैतानियाँ, लड़ाइयाँ, हारना-जीतना और इन सब बातों से सबक़ लेना गायब है. ऑनलाइन पढ़ाई भी कोई पढ़ाई है भला! वो क्लास ही क्या, जहाँ बच्चे आँखों-आँखों में सौ कहानियाँ न रच दें, टीचर के पलटते ही मुँह दबाकर हँसे नहीं! 
आप सोचते होंगे कि इतनी निराशा क्यों? ये सब कौन-सा जीवन भर चलने वाला है! मैं भी मानती हूँ कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा और गाड़ी भी पटरी पर लौट आएगी लेकिन ये लौट आना उतना आसान नहीं होगा! आने के बाद हमें हर रोज और जूझना होगा, फिर से उठ खड़े होने के लिए जो लड़ाई होगी उसमें कुछ और नहीं बल्कि survival of the fittest और natural selection की थ्योरी ही काम आयेगी. ये बात सुकून न देकर एक बेचैनी पैदा करती है, स्थिति चिंताजनक होने वाली है. हो सके तो हम इसके लिए मानसिक रूप से तैयार भी रहें.
दुनिया यूँ कब बदल जायेगी, किसको पता था. एक अदृश्य वायरस ने सबको उलटे पैर घरों में लौटाकर क़ैद कर दिया है और खुद हर तरफ़ नाचता फिर रहा है. इसने दिखा दिया कि चाँद-तारों को चूम अपनी पीठ थपथपाने वाले और सारी विलासिताओं से भरपूर जीवन जी ख़ुद को विधाता मान लेने वाले हम मनुष्यों की औक़ात बस इतनी ही है.  
- प्रीति 'अज्ञात' #3rdMay2020


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गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

सलमान, आप सही मायने में नायक हैं!



मेरी तरह बहुत से लोग होंगे जिनके प्रिय सिने अभिनेताओं की सूची में सलमान खान का नाम शायद शामिल न भी हो लेकिन फ़िल्मों से इतर  सलमान की वो निज़ी ज़िंदगी जिसमें वे सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और जितना बन पड़े, मदद करते ही हैं; उसकी मैं हमेशा से ही प्रशंसक रही हूँ. बीते दिनों ही इंडस्ट्री के लॉक डाउन के चलते बेरोजगार हुए हजारों दिहाड़ी मजदूरों के अकाउंट में उन्होंने लगभग पाँच करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं, साथ ही उनके घर राशन भी पहुँचाया है. नायक होने के यही सही मायने हैं.

आज इसी सलमान खान ने एक इतना प्रभावपूर्ण वीडियो शेयर किया है कि जो भी देखेगा उसके दिल से सलमान के लिए दुआ ही निकलेगी. कोरोना वायरस से जूझते देश के इस विपत्ति काल में उनकी मानवीय संवेदना और गंभीरता झकझोरकर रख देती है और आप यह मानने को विवश हो जाते हैं कि ये दबंग ही असली सुल्तान है.

हम सभी जानते हैं कि कोरोना के विरुद्ध, युद्ध में खड़े होने के लिए    लॉकडाउन का पालन ही एकमात्र सबसे बड़ा हथियार है. इसके लिए हर उपलब्ध माध्यम से निरंतर अपील भी की जा रही है. लेकिन फिर भी जनता में से बहुत से ऐसे लोग हैं जो अभी भी इसे हल्के में ले रहे हैं. लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले इन्हीं लोगों को सलमान ने जमकर लताड़ा है. साथ ही सभी आवश्यक सेवाओं में जुटे लोगों पर हमला करने वालों पर ख़ासी नाराज़गी भी ज़ाहिर की है. 

यह वीडियो ऐसे समय पर आया है जब मुरादाबाद में डॉक्टर और एम्बुलेंस पर हुए दुर्भाग्यपूर्ण हमले की देश भर में निंदा हो रही है. साढ़े 9 मिनट के इस वीडियो में सलमान कहते हैं कि "ज़िंदगी का 'बिग बॉस' शुरू हो चुका है. ये बीमारी ऊँचनीच, जातपात, उम्र कुछ नहीं देखती. बाहर मत जाओ, गैदरिंग न करो. भगवान हमारे अन्दर है जो करना है घर पर करो."
नाराज़गी जताते हुए वे आगे कहते हैं, "आख़िर ये सब किसके लिए है?  लोग इस बात का जवाब दें जो सरकार की बात नहीं सुन रहे. जो आपकी सेवा कर रहे हैं, उन पर आपने पत्थर बरसा दिए? चंद जोकरों की वजह से ये बीमारी फैली जा रही है." उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि "दुआ करो वो नौबत न आये कि आपको समझाने के लिए मिलिट्री बुलाई जाए."

खैर, सबके चहेते सल्लू का राष्ट्र के नाम संबोधन तो वैसे भी पेंडिंग था ही. अच्छा ये हुआ कि इधर मोदी जी ने अपील की और उधर सलमान ने इस अपील का उल्लंघन कर रहे लोगों की अच्छे से क्लास ले ली. 
सलमान की अपनी फैन फॉलोइंग है. अपने प्रिय सेलिब्रिटी की कही बात लोग ध्यान से सुनते भी हैं. ऐसे में माना जा सकता है कि lockdown का पालन करवाने के लिये मोदी और सलमान की ये जुगलबंदी और डबल डोज़ अवश्य ही कारगर सिद्ध होगी. 
इस वीडियो के लिए सलमान की जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है. उन्हें हम सबका सलाम, शुक्रिया. 
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