यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

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बुधवार, 18 जुलाई 2018

उम्मीदों की टूटती इमारतें

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'रोटी, कपड़ा और मकान' जीवन की मूलभूत आवश्यकता है. मेहनत से रोटी और कपड़े की व्यवस्था तो हो जाती है पर दो दशक पहले तक मध्यमवर्गीय इंसा...
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Preeti 'Agyaat'
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