यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

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सोमवार, 21 नवंबर 2022

तबस्सुम की मुस्कान हमारे साथ है

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तबस्सुम के बारे में सोचती हूँ तो एक हँसता-खिलखिलाता चेहरा सामने आ खड़ा होता है। हँसी ऐसी कि जैसे सर्दियों की सुबह में धरती पर महकता हरसिंगार ...
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Preeti 'Agyaat'
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