यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

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बुधवार, 24 सितंबर 2025

आलू की सब्जी

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  एक बार का बड़ा मजेदार किस्सा है। यह जब घटित हुआ था, तब बहुत दुखदायी था लेकिन अब सोचकर भी हँसी आती है। तो हुआ यूँ कि हर रोज की तरह उस दिन भी...
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रविवार, 5 मार्च 2023

सुख की परिभाषा

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 इतने विशाल संसार में न जाने ऐसी कितनी वस्तुएं हैं जिनके न होने का दुख हमारे साथ चलता है। दुख न भी हो तो कम-से-कम उन्हें पा लेने की ख्वाहिश ...
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Preeti 'Agyaat'
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