यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2022

ये कैसा विरोधाभास? हम प्रेम करते हैं, और विरोध भी!

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हम भारतीयों ने प्रेम को सदा ही पवित्र माना है। समय-समय पर पौराणिक चरित्रों की दुहाई देते हुए भी नहीं अघाते। क्यों न हो, यह ईश्वरीय भाव ही तो...
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Preeti 'Agyaat'
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