यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

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शनिवार, 11 जून 2022

कौन कहता है कि छलनी को फिर से चमचा नहीं बनाया जा सकता!

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कौन कहता है कि आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता  एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो  अब दुष्यंत साहब तो यह कहकर फिरी (भारमुक्त) हो लिए लेकिन ए...
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Preeti 'Agyaat'
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