यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

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गुरुवार, 30 नवंबर 2017

जब तक जीवन शेष है, हर बात की गुंजाइश शेष है।

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पता है तुम्हें? प्रत्येक स्त्री के जीवन में वह क्षण एक बार तो आता ही है जब उसे यह लगने लगता है कि किसी को उसकी ज़रुरत नहीं और उसके चले जान...
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Preeti 'Agyaat'
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