यूँ होता....तो क्या होता!

यहाँ आपको कुछ जन की और कुछ मन की बातें मिलेंगीं। सबकी मुस्कान बनी रहे और हम किसी भी प्रकार की वैमनस्यता से दूर रह, एक स्वस्थ, सकारात्मक समाज के निर्माण में सहायक हों। बस इतना सा ख्वाब है!

गुरुवार, 22 मार्च 2018

एक बिहारी सबपे भारी

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मेरी मित्रता-सूची में सबसे अधिक संख्या में यदि कोई राज्य नज़र आता है तो वो है बिहार/ झारखंड। पता नहीं, यह महज़ संयोग है या कि यहाँ के लोग सोश...
मंगलवार, 20 मार्च 2018

केदारनाथ सिंह

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*मुझे विश्वास है यह पृथ्वी रहेगी यदि और कहीं नहीं तो मेरी हड्डियों में यह रहेगी जैसे पेड़ के तने में रहते हैं दीमक जैसे दाने में रह ले...
रविवार, 18 मार्च 2018

सौदामिनी...

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किसी को किसी से कुछ भी नहीं चाहिए होता है. हर रिश्ता केवल मुट्ठी भर समय की मांग करता है. उसका टिकना, बनना, टूटना, बिखरना इस एक बात पर ही टि...
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बुधवार, 14 मार्च 2018

स्त्री और पुरुष

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पुरुष होने के भी अपने फ़ायदे हैं. जब भी दिल करे आप जब चाहें, जहाँ चाहें, बे-रोकटोक आ-जा सकते हैं. आपके आने-जाने, सुरक्षा-संबंधी फ़िक्र करने औ...
रविवार, 25 फ़रवरी 2018

दीवाना किसे बनाएगी ये लड़की!

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आज सुबह से ही मैं श्रीदेवी के असमय निधन से स्तब्ध हूँ. सोशल मीडिया उनकी ख़बरों से पटा पड़ा है. बहुत कुछ है जो कहा गया, बहुत कुछ कहना शेष भी र...
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दुर्भाग्य! उनकी मृत्यु की ख़बर, अफ़वाह नहीं है

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सुबह 5.30 के अलार्म के साथ नींद खुलती है. आदतन वाईफाई ऑन करती हूँ तभी एक मित्र का मैसेज दिखाई देता है, लिंक है कोई. वो सुप्रभात वाली मित्र ...
बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

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भाषा, संवाद का जरिया है अहसासों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है. हम किसी भी माध्यम में पढ़ें हों, पर जहाँ बचपन गुजरा वहाँ की भाषा से लगाव ह...
सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

इतिहास हमेशा ख़ुद को दोहराता है

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बाल्यकाल से ही हम गाने सुनने के बहुत शौक़ीन रहे हैं. इतना मन लगाकर सुनते थे कि गीतों के बोल भी एकदम सही याद रहते थे. गायिका तो सपने में भी न...
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बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

ये आकाशवाणी है!

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ये आकाशवाणी है! (विश्व रेडियो दिवस पर) सोशल मीडिया का यह लाभ तो अवश्य हुआ है कि जिन तिथियों की तनिक भी जानकारी नहीं होती थी अब उनके बारे ...
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मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

सुनो, लड़कियों...क्रांति का उद्घोष करो!

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डिस्क्लेमर - इस पोस्ट को बीयर प्रेमियों से किसी प्रकार का कोई बैर न समझा जाए.  जब किसी को लड़कियों के बीयर पीने से डर लगता है तो मुझे भी यक़...
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पहले उसकी जात पूछ लेना!

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अंकित के साथ जो हुआ वह हमारे काले गुनाहों की सूची में एक और बदनुमा दाग़ लगाकर आगे बढ़ गया है. इस जघन्य कृत्य की जितनी भी निंदा की जाए, कम है ...
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ध्यान रहे कि 'गले लगना और गले पड़ना दो अलग अलग बातें हैं'

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यदि भारतीय संस्कृति के मूलभूत नियमों और सभ्यता की बात करें तो यहाँ अपरिचित के गले लगना, आज भी असंस्कारी माना जाता है. यहाँ तक कि स्त्री-पु...
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भारतीय समाज और वादे का नाजुक शीशमहल

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भारतीय समाज में वादा, प्रॉमिस, वचन की महत्ता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक वचन के कारण ही पूरी रामायण रच दी गई. 'प्राण ज...
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शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

चतुर्थ पावन प्रस्तुति (वैलेंटाइन यज्ञ)

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'टेडी' नाम सुनते ही एक नरम, मुलायम, गुदगुदे फ़र वाले खिलौने की याद आ जाती है, जिसे कभी खिलौना माना ही नहीं गया. अपने बचपन और उसके बा...

चॉकलेट, ज्वालामुखी और डार्क फैंटेसी

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चॉकलेट का प्रादुर्भाव कब और कहाँ हुआ और कैसे ये हमारे देश में घुसपैठ कर हर उम्र के लोगों की चहेती बन गई, इसे बताने में मुझे कोई दिलचस्पी नह...
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गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

द्वितीय पावन दिवस- Propose day

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सुरभित महायज्ञ के द्वितीय पावन दिवस के लिए आवश्यक सूचना -लड़कियों को तरह-तरह के pose, बिना purpose देना अत्यधिक मनभावन लगता है, सेल्फ़ी ने उन...

फूल तुम्हें भेजा है ख़त में!

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आज इस साप्ताहिक महायज्ञ में आहुति का प्रथम दिवस है - मंत्र जाप - बेरोज़गार इंसान को किसी रोज, कोई रोज़ मिल जाने से वह रोज़गार वाला नहीं बन जा...
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बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

वैलेंटाइन महायज्ञ - Rose Day

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साप्ताहिक महायज्ञ - जैसा कि आप सबको विदित ही है कि आज की पावन बेला में वैलेंटाइन महायज्ञ का सुंदर शुभारम्भ हो चुका है. आइये पवित्र पंडाल ...
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मंगलवार, 30 जनवरी 2018

दुःख का दुःख

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दुःख बाँटने से कम हो जाता है, ऐसा मैं बिल्कुल नहीं मानती। बल्कि किसी से साझा करने के बाद हम अपने साथ-साथ उसके भी पुराने ज़ख्मों को अनजाने म...
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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

पुस्तक का मनोविज्ञान - 2

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विश्व पुस्तक मेला- क़िताबें, बातें, मुलाक़ातें और जलवा-ए-सेल्फ़ी हिन्दी फ़िल्मों के इतिहास को खंगालेंगे तो राजेंद्र कुमार जी के दशक की फ़िल्मो...
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शुक्रवार, 5 जनवरी 2018

पुस्तक का मनोविज्ञान - 1

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पुस्तक से जुड़ी विशेष और सच्ची बात यह है कि प्रत्येक लेखक चाहता है कि उसकी पुस्तक न केवल प्रतिष्ठित साहित्यकारों द्वारा पढ़ी जाए बल्कि वे उस ...
रविवार, 31 दिसंबर 2017

दिलचस्प दिसंबर

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दिसंबर बड़ा ही दिलचस्प महीना है। यही वो ज़ालिम माह है जिसमें सी.आई.डी. के आखिरी दो मिनटों की तरह बीते ग्यारह महीनों के सारे गुनाहों की लंबी...
शनिवार, 30 दिसंबर 2017

बस, यही अंतिम इच्छा कि काश! प्रवेश द्वार पर ये द्वारपाल न हों!

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अब चूंकि नववर्ष में प्रवेश तय है और हर बार की तरह सभी अपनी-अपनी योजनाओं में व्यस्त हैं (जिनका वैसे होना कुछ भी नहीं है), ऐसे में कुछ बिन्दु...
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सोमवार, 11 दिसंबर 2017

संपादकीय - जनवरी 2017 ( हस्ताक्षर वेब पत्रिका) : क्या हम सचमुच समाधान ढूँढने में सक्षम नहीं?

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ये कैसी होनी है, जिसे हम विधाता पर डाल निश्चिन्त हो जाते हैं! उन बच्चों ने तो अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखी थी। कितनों की अधूरी ड्रॉइंग उन...
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