रविवार, 18 मार्च 2018

सौदामिनी...

किसी को किसी से कुछ भी नहीं चाहिए होता है. हर रिश्ता केवल मुट्ठी भर समय की मांग करता है. उसका टिकना, बनना, टूटना, बिखरना इस एक बात पर ही टिका है. कोई तो हो, जो कहे.....कोई तो हो, जो सुने! अपने और पराये के बीच की दूरी इसी समय के दोराहे से होकर गुजरती है. कोई दुःख में काँधे पर हाथ भर रख दे, तो आँसुओं को कैसा सहारा मिल जाता है और जो कभी मुस्कान को उसका जोड़ीदार मिल जाए तो फ़िर उसे खिलखिलाहट में बदलते पल भर की भी देर नहीं लगती. बस ये पाषाण चुप्पियाँ ही हैं जो इंसान को भीतर-ही-भीतर लीलने लगती हैं. धीरे-धीरे गहराई बढ़ती है और गड़प की ध्वनि के साथ अचानक खेल ख़त्म! अब मातम मनाइये या उम्र भर का अफ़सोस कीजिए ....बदले में यही चुप्पी ही हाथ आएगी. दिल सर पटकेगा और एक ही बात दोहराएगा....काश! काश! काश!
लेकिन इस काश! को समझने का समय भी किसके पास होता है? कब होता है?
तक़लीफ़ यह है कि उसे अब भी ज़िंदग़ी से ग़ज़ब का इश्क़ है. 
ख़ामोशियों से चीखती आवाज़ें और सौदामिनी देखें...आख़िर कब तक टिकते हैं!
'सौदामिनी....एक अधूरी कहानी' शनैः शनैः समाप्ति की ओर
- © प्रीति 'अज्ञात'

2 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को नव संवत्सर और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। विक्रम संवत 2075 आप सबके जीवन में सुख, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आये यही हमारी कामना है।


    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, नव संवत्सर और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं