शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

सब कड़ा-कड़ी का खेला

हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। 
अपराधियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही की जाए।
उन्हें कड़े-से- कड़ा दंड दिया जाएगा। 
और इस तरह भारत देश में कड़ा-कड़ी-कड़े का रायता यूँ ही फैलता जा रहा है। इसके प्रचार-प्रसार में हम सभी अपने-आप को हार्दिक धन्यवाद देकर इस पर कड़ा दुःख प्रगट करते हैं। कृपया 'कड़ा रस' से ओतप्रोत इस 'भक्तिगीत' को अपनी caller tune बनाएँ-

कड़ा पहन के बोले साहब, कड़ी है इसकी निंदा
सोच रहा अब अपराधी को, रहने न दूँगा ज़िंदा 
रहने न दूँगा ज़िंदा, कार्यवाही भी कड़ी होगी
दुर्घटना की जाँच को भैया, समिति खड़ी होगी
समिति खड़ी होगी अउर कड़ा दंड दिलाना होगा 
कड़ी सुरक्षा संग ले अब हेलीकॉप्टर से जाना होगा

उफ़्फ़ कड़कड़ ये बिजली चमकी मनवा बैठत जाय 
साहब कड़क के गरजे रामू, चाय ल्यो बनाय
मौसम का है खेल सब, हाय मन अपना भारी है 
कैसे संभले विकट बड़ी, हमपे जिम्मे'दारी है 
तभी कूद के लल्लन बोले, काहे हिम्मत हारी है 
मुए अगस्त को आग लगे, पर साहब.....गश्त जारी है!
- प्रीति 'अज्ञात' 
#shame
pic credit: Google

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी रचना प्रीती जी , समसायिक घटना पर अच्छा प्रहार ... वंदना बाजपेयी

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