बुधवार, 23 अप्रैल 2014

प्रेम डगर

Disclaimer :  यह एक अच्छे मूड में लिखे गये विचार हैं, जिसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं !

प्रेम' मात्र एक शब्द ही नहीं, जीवन है पूरा ! यह वो 'शै' है, जिसे हरेक ने किसी-न-किसी रूप में पाया है, सराहा है, महसूसा है या खोया है. पर इसके अस्तित्व से कोई भी अनजान नहीं. कुछ लोग इसे 'रोग' भी कहते हैं, यदि यह सच है..तो ये ऐसा रोग है; जिससे हर कोई ग्रसित होना चाहता है. वजह ठीक वैसी ही, जैसे कि किसी रेस्टोरेंट में खाना ऑर्डर करने के बाद बगल वाली टेबल पर नज़र जाते ही लगता है, उफ्फ..हमने ये क्यूँ नहीं मँगाया ! कहते हैं न, 'दूर के ढोल सुहावने लगते हैं'...पहली दृष्टि में ही सब कुछ खूबसूरत दिखाई देता है. आसपास के नज़ारे, फूल-पत्ती, ज़मीं-आसमां, यहाँ तक की खाने की थाली में भी वही एक चेहरा प्रतिबिंब बनकर उभरता रहता है. दिलो-दिमाग़, आँखों में वही बसा हुआ...अनायास ही होठों पर वो हल्की सी मुस्कुराहट बयाँ कर ही देती है, कि जनाब / मोहतरमा इश्क़ के मरीज बन चुके हैं. ये खुद ही खोदी गई ऐसी क़ब्र है, जिस पर फूल चढ़ाने भी हमें ही आना है. इसके सुखद होने तक सब आपके साथ होते हैं, और साइड इफेक्ट्स दिखते ही दुनियादारी की तमाम बातें कानों में पड़ने लगती हैं. फिर भी यह एक ऐसी डगर है, जिस पर सब चलना चाहते हैं, मंज़िल मिले न मिले पर रास्ता तो तय करना ही है !

मुझे लगता है, इसका दोषी 'बॉलीवुड' है. फिल्मों ने हम सबके दिमाग़ में कूट-कूटकर भर दिया है, कि प्रेम से बेहतर कुछ नहीं. यही है, जो सारे दुखों का अंत करता है. वरना 'प्रेम' के हर मूड के हिसाब से हम सबके दिमाग़ में गाने क्यूँ बजने लगते हैं ? गाने न होते तो, प्रेम में क्या रह जाता..बिना घी की रोटियों सा सूखा, बेस्वाद, कड़कड़ाता-सा ! दुख में क्या गाया जाता फिर ? अगर 'तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही...' न होता तो ! गीत-संगीत की धुन पर आँसू भी तो कैसे सुर में और सूपर-फास्ट बहते हैं ! पर उनका क्या जो फिल्में देखते ही नहीं......क्या उन्हें भी 'प्रेम' होता है ??????

जो भी है..होना चाहिए. पा लिया, तो जीवन खुशी से कटेगा और न पाया तो उम्मीद में ! नहीं कोसना चाहिए इस अहसास को, भ्रम ही क्यूँ न हो, इसका होना ही काफ़ी है !

MORAL :  सॉरी, पर 'इश्क़' में काहे का मोरल ! :P 

प्रीति 'अज्ञात'

9 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम एक ऐसा विषय है, जिसके इर्द गिर्द सारा हालीवूड वालिवूड फीका हो जाता है :)
    सच कहा एक ऐसी क़बरगाह, जहां खुद फूल चढ़ाने आना पड़ेगा :)
    मॉरल की पुंछ :D

    उत्तर देंहटाएं
  2. हाय! इश्क..सही लिखा है प्रीती जी।

    उत्तर देंहटाएं
  3. भ्रम ही क्युं न हो, इसका होना ही काफी है..
    लाजवाब।।।

    उत्तर देंहटाएं
  4. शुक्रिया, अंकुर जी :)

    उत्तर देंहटाएं
  5. माया है भ्रम है महोब्बत की दुनिया!
    Nice post..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. ये जीवन भी तो एक भ्रम ही है ! धन्यवाद !

      हटाएं
  6. बहुत खूब प्रीती जी. में आप का फेन हो गया......***

    उत्तर देंहटाएं